श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.5.27

नवम स्कन्ध · अध्याय 5 · अथ पञ्चमोऽध्यायः

इत्येतत् पुण्यमाख्यानमम्बरीषस्य भूपतेः।

संकीर्तयन्‍ननुध्यायन् भक्तो भगवतो भवेत्॥ २७

ityetat puṇyamākhyānamambarīṣasya bhūpateḥ|

saṃkīrtayannanudhyāyan bhakto bhagavato bhavet|| 27

अर्थ

परीक्षित्! महाराज अम्बरीषका यह परम पवित्र आख्यान है। जो इसका संकीर्तन और स्मरण करता है, वह भगवान्‌का भक्त हो जाता है॥ २७॥

इति श्रीमद्भागवते महापुराणे पारमहंस्यां संहितायां नवमस्कन्धेऽम्बरीषचरितं ५

नाम पञ्चमोऽध्यायः॥ ५॥

टिप्पणियाँ

  1. ५

    चरिते।

    (मुद्रित पृष्ठ 31)

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