॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 9.6.3
एते क्षेत्रे१ प्रसूता वै पुनस्त्वांगिरसाः स्मृताः।
रथीतराणां प्रवराः क्षत्रोपेता द्विजातयः॥ ३
ete kṣetre prasūtā vai punastvāṃgirasāḥ smṛtāḥ|
rathītarāṇāṃ pravarāḥ kṣatropetā dvijātayaḥ|| 3
अर्थ
यद्यपि ये सब रथीतरकी भार्यासे उत्पन्न हुए थे, इसलिये इनका गोत्र वही होना चाहिये था जो रथीतरका था, फिर भी वे आंगिरस ही कहलाये। ये ही रथीतर-वंशियोंके प्रवर (कुलमें सर्वश्रेष्ठ पुरुष) कहलाये। क्योंकि ये क्षत्रोपेत ब्राह्मण थे—क्षत्रिय और ब्राह्मण दोनों गोत्रोंसे इनका सम्बन्ध था॥ ३॥
टिप्पणियाँ
- १
क्षेत्रप्रसू०।