श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.6.30

नवम स्कन्ध · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

ततः काल उपावृत्ते कुक्षिं निर्भिद्य दक्षिणम्।

युवनाश्‍वस्य तनयश्‍चक्रवर्ती जजान३ ह॥ ३०

tataḥ kāla upāvṛtte kukṣiṃ nirbhidya dakṣiṇam|

yuvanāśvasya tanayaścakravartī jajāna ha|| 30

अर्थ

इसके बाद प्रसवका समय आनेपर युवनाश्‍वकी दाहिनी कोख फाड़कर उसके एक चक्रवर्ती पुत्र उत्पन्‍न हुआ॥ ३०॥✎ 1636

टिप्पणियाँ

  1. ३

    ह्यजायत।

    (मुद्रित पृष्ठ 34)
इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1636 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: पुत्र-प्राप्तिके → पुत्रप्राप्तिके

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