इसके बाद प्रसवका समय आनेपर युवनाश्वकी दाहिनी कोख फाड़कर उसके एक चक्रवर्ती पुत्र उत्पन्न हुआ॥ ३०॥✎ 1636
ततः काल उपावृत्ते कुक्षिं निर्भिद्य दक्षिणम्।
युवनाश्वस्य तनयश्चक्रवर्ती जजान ह॥ ३०
इसके बाद प्रसवका समय आनेपर युवनाश्वकी दाहिनी कोख फाड़कर उसके एक चक्रवर्ती पुत्र उत्पन्न हुआ॥ ३०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.6.30 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 34) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/6/30/