श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.7.10

नवम स्कन्ध · अध्याय 7 · अथ सप्तमोऽध्यायः

जातः सुतो ह्यनेनांग मां यजस्वेति सोऽब्रवीत्।

यदा पशुर्निर्दशः स्यादथ मेध्यो भवेदिति॥ १०

jātaḥ suto hyanenāṃga māṃ yajasveti so'bravīt|

yadā paśurnirdaśaḥ syādatha medhyo bhavediti|| 10

अर्थ

पुत्र होते ही वरुणने आकर कहा—‘हरिश्‍चन्द्र! तुम्हें पुत्र प्राप्त हो गया। अब इसके द्वारा मेरा यज्ञ करो।’ हरिश्‍चन्द्रने कहा—‘जब आपका यह यज्ञपशु (रोहित) दस दिनसे अधिकका हो जायगा, तब यज्ञके योग्य होगा’॥ १०॥✎ 1637 2046

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #1637 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: विश्‍वा-मित्र → विश्‍वामित्र
  • #2046 यूनिकोड-रूप (अक्षर वही): डि़ → ड़ि

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