पुत्र होते ही वरुणने आकर कहा—‘हरिश्चन्द्र! तुम्हें पुत्र प्राप्त हो गया। अब इसके द्वारा मेरा यज्ञ करो।’ हरिश्चन्द्रने कहा—‘जब आपका यह यज्ञपशु (रोहित) दस दिनसे अधिकका हो जायगा, तब यज्ञके योग्य होगा’॥ १०॥✎ 16372046
जातः सुतो ह्यनेनांग मां यजस्वेति सोऽब्रवीत्।
यदा पशुर्निर्दशः स्यादथ मेध्यो भवेदिति॥ १०
पुत्र होते ही वरुणने आकर कहा—‘हरिश्चन्द्र! तुम्हें पुत्र प्राप्त हो गया। अब इसके द्वारा मेरा यज्ञ करो।’ हरिश्चन्द्रने कहा—‘जब आपका यह यज्ञपशु (रोहित) दस दिनसे अधिकका हो जायगा, तब यज्ञके योग्य होगा’॥ १०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.7.10 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 39) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/7/10/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)