इसी प्रकार दूसरे, तीसरे, चौथे और पाँचवें वर्ष भी रोहितने अपने पिताके पास जानेका विचार किया; परन्तु बूढ़े ब्राह्मणका वेश धारण कर हर बार इन्द्र आते और उसे रोक देते॥ १९॥
एवं द्वितीये तृतीये चतुर्थे पंचमे तथा।
अभ्येत्याभ्येत्य स्थविरो विप्रो भूत्वाऽऽह वृत्रहा॥ १९
इसी प्रकार दूसरे, तीसरे, चौथे और पाँचवें वर्ष भी रोहितने अपने पिताके पास जानेका विचार किया; परन्तु बूढ़े ब्राह्मणका वेश धारण कर हर बार इन्द्र आते और उसे रोक देते॥ १९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.7.19 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 40) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/7/19/