श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.8.28

नवम स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

श्रीशुक उवाच

इत्थं गीतानुभावस्तं भगवान् कपिलो मुनिः।

अंशुमन्तमुवाचेदमनुगृह्य धिया नृप॥ २८

itthaṃ gītānubhāvastaṃ bhagavān kapilo muniḥ|

aṃśumantamuvācedamanugṛhya dhiyā nṛpa|| 28

अर्थ

श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! जब अंशुमान्‍ने भगवान् कपिलमुनिके प्रभावका इस प्रकार गान किया, तब उन्होंने मन-ही-मन अंशुमान्पर बड़ा अनुग्रह किया और कहा॥ २८॥

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