ime ca pitaro dagdhā gaṃgāmbho'rhanti netarat|| 29
अर्थ
श्रीभगवान्ने कहा—‘बेटा! यह घोड़ा तुम्हारे पितामहका यज्ञपशु है। इसे तुम ले जाओ। तुम्हारे जले हुए चाचाओंका उद्धार केवल गंगाजलसे होगा, और कोई उपाय नहीं है’॥ २९॥
अश्वोऽयं नीयतां वत्स पितामहपशुस्तव।
इमे च पितरो दग्धा गंगाम्भोऽर्हन्ति नेतरत्॥ २९
श्रीभगवान्ने कहा—‘बेटा! यह घोड़ा तुम्हारे पितामहका यज्ञपशु है। इसे तुम ले जाओ। तुम्हारे जले हुए चाचाओंका उद्धार केवल गंगाजलसे होगा, और कोई उपाय नहीं है’॥ २९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.8.29 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 45) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/8/29/