वनमें जानेपर बुढ़ापेके कारण जब बाहुककी मृत्यु हो गयी, तब उसकी पत्नी भी उसके साथ सती होनेको उद्यत हुई। परन्तु महर्षि और्वको यह मालूम था कि इसे गर्भ है। इसलिये उन्होंने उसे सती होनेसे रोक दिया॥ ३॥
वृद्धं तं पंचतां प्राप्तं महिष्यनु मरिष्यती।
और्वेण जानताऽऽत्मानं प्रजावन्तं निवारिता॥ ३
वनमें जानेपर बुढ़ापेके कारण जब बाहुककी मृत्यु हो गयी, तब उसकी पत्नी भी उसके साथ सती होनेको उद्यत हुई। परन्तु महर्षि और्वको यह मालूम था कि इसे गर्भ है। इसलिये उन्होंने उसे सती होनेसे रोक दिया॥ ३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.8.3 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 41) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/8/3/