विजयका भरुक, भरुकका वृक और वृकका पुत्र हुआ बाहुक। शत्रुओंने बाहुकसे राज्य छीन लिया, तब वह अपनी पत्नीके साथ वनमें चला गया॥ २॥
भरुकस्तत्सुतस्तस्माद् वृकस्तस्यापि बाहुकः।
सोऽरिभिर्हृतभू राजा सभार्यो वनमाविशत्॥ २
विजयका भरुक, भरुकका वृक और वृकका पुत्र हुआ बाहुक। शत्रुओंने बाहुकसे राज्य छीन लिया, तब वह अपनी पत्नीके साथ वनमें चला गया॥ २॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.8.2 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 41) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/8/2/