श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.1.12

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

एतस्मादपरं किंचिन्मनः शुद्ध्यै न विद्यते।

जन्मान्तरे भवेत्पुण्यं तदा भागवतं लभेत्॥ १२

etasmādaparaṃ kiṃcinmanaḥ śuddhyai na vidyate|

janmāntare bhavetpuṇyaṃ tadā bhāgavataṃ labhet|| 12

अर्थ

मनकी शुद्धिके लिये इससे बढ़कर कोई साधन नहीं है। जब मनुष्यके जन्म-जन्मान्तरका पुण्य उदय होता है, तभी उसे इस भागवतशास्त्रकी प्राप्ति होती है॥ १२॥

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