श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.1.25

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

एकदा हि विशालायां चत्वार ऋषयोऽमलाः।

सत्सङ्गार्थं समायाता ददृशुस्तत्र नारदम्॥ २५

ekadā hi viśālāyāṃ catvāra ṛṣayo'malāḥ|

satsaṅgārthaṃ samāyātā dadṛśustatra nāradam|| 25

अर्थ

एक दिन विशालापुरीमें वे चारों निर्मल ऋषि सत्संगके लिये आये। वहाँ उन्होंने नारदजीको देखा॥ २५॥

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