श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.1.42

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

बालोवाच

भो भोः साधो क्षणं तिष्ठ मच्चिन्तामपि नाशय।

दर्शनं तव लोकस्य सर्वथाघहरं परम्॥ ४२

bho bhoḥ sādho kṣaṇaṃ tiṣṭha maccintāmapi nāśaya|

darśanaṃ tava lokasya sarvathāghaharaṃ param|| 42

अर्थ

युवतीने कहा—अजी महात्माजी! क्षणभर ठहर जाइये और मेरी चिन्ताको भी नष्ट कर दीजिये। आपका दर्शन तो संसारके सभी पापोंको सर्वथा नष्ट कर देनेवाला है॥ ४२॥

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