श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.1.47

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

इदानीं शृणु मद्वार्तां सचित्तस्त्वं तपोधन।

वार्ता मे वितताप्यस्ति तां श्रुत्वा सुखमावह॥ ४७

idānīṃ śṛṇu madvārtāṃ sacittastvaṃ tapodhana|

vārtā me vitatāpyasti tāṃ śrutvā sukhamāvaha|| 47

अर्थ

तपोधन! अब ध्यान देकर मेरा वृत्तान्त सुनिये। मेरी कथा वैसे तो प्रसिद्ध है, फिर भी उसे सुनकर आप मुझे शान्ति प्रदान करें॥ ४७॥

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