श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.1.55

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

नारद उवाच

ज्ञानेनात्मनि पश्यामि सर्वमेतत्तवानघे।

न विषादस्त्वया कार्यो हरिः शं ते करिष्यति॥ ५५

jñānenātmani paśyāmi sarvametattavānaghe|

na viṣādastvayā kāryo hariḥ śaṃ te kariṣyati|| 55

अर्थ

नारदजीने कहा—साध्वि! मैं अपने हृदयमें ज्ञानदृष्टिसे तुम्हारे सम्पूर्ण दुःखका कारण देखता हूँ, तुम्हें विषाद नहीं करना चाहिये। श्रीहरि तुम्हारा कल्याण करेंगे॥ ५५॥

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