॥ श्रीहरिः ॥
शृणुष्वावहिता बाले युगोऽयं दारुणः कलिः।
तेन लुप्तः सदाचारो योगमार्गस्तपांसि च॥ ५७
śṛṇuṣvāvahitā bāle yugo'yaṃ dāruṇaḥ kaliḥ|
tena luptaḥ sadācāro yogamārgastapāṃsi ca|| 57
अर्थ
नारदजीने कहा—देवि! सावधान होकर सुनो। यह दारुण कलियुग है। इसीसे इस समय सदाचार, योगमार्ग और तप आदि सभी लुप्त हो गये हैं॥ ५७॥
शृणुष्वावहिता बाले युगोऽयं दारुणः कलिः।
तेन लुप्तः सदाचारो योगमार्गस्तपांसि च॥ ५७
नारदजीने कहा—देवि! सावधान होकर सुनो। यह दारुण कलियुग है। इसीसे इस समय सदाचार, योगमार्ग और तप आदि सभी लुप्त हो गये हैं॥ ५७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.1.57 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 38) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/padma/1/57/