श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.1.63

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

भक्तिरुवाच

कथं परीक्षिता राज्ञा स्थापितो ह्यशुचिः कलिः।

प्रवृत्ते तु कलौ सर्वसारः कुत्र गतो महान्॥ ६३

kathaṃ parīkṣitā rājñā sthāpito hyaśuciḥ kaliḥ|

pravṛtte tu kalau sarvasāraḥ kutra gato mahān|| 63

अर्थ

भक्तिने कहा—राजा परीक्षित‍्ने इस पापी कलियुगको क्यों रहने दिया? इसके आते ही सब वस्तुओंका सार न जाने कहाँ चला गया?॥ ६३॥

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