श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.1.72

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

अत्युग्रभूरिकर्माणो नास्तिका रौरवा जनाः।

तेऽपि तिष्ठन्ति तीर्थेषु तीर्थसारस्ततो गतः॥ ७२

atyugrabhūrikarmāṇo nāstikā rauravā janāḥ|

te'pi tiṣṭhanti tīrtheṣu tīrthasārastato gataḥ|| 72

अर्थ

तीर्थोंमें नाना प्रकारके अत्यन्त घोर कर्म करनेवाले, नास्तिक और नारकी पुरुष भी रहने लगे हैं; इसलिये तीर्थोंका भी प्रभाव जाता रहा॥ ७२॥

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