श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.2.19

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

नृणां जन्मसहस्रेण भक्तौ प्रीतिर्हि जायते।

कलौ भक्तिः कलौ भक्तिर्भक्‍त्या कृष्णः पुरः स्थितः॥ १९

nṛṇāṃ janmasahasreṇa bhaktau prītirhi jāyate|

kalau bhaktiḥ kalau bhaktirbhaktyā kṛṣṇaḥ puraḥ sthitaḥ|| 19

अर्थ

मनुष्योंका सहस्रों जन्मके पुण्य-प्रतापसे भक्तिमें अनुराग होता है। कलियुगमें केवल भक्ति, केवल भक्ति ही सार है। भक्तिसे तो साक्षात् श्रीकृष्णचन्द्र सामने उपस्थित हो जाते हैं॥ १९॥

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