श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.2.43

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

ततश्चिन्तातुरः सोऽथ बदरीवनमागतः।

तपश्‍चरामि चात्रेति तदर्थं कृतनिश्‍चयः॥ ४३

tataścintāturaḥ so'tha badarīvanamāgataḥ|

tapaścarāmi cātreti tadarthaṃ kṛtaniścayaḥ|| 43

अर्थ

तब नारदजी बहुत चिन्तातुर हुए और बदरीवनमें आये। ज्ञान-वैराग्यको जगानेके लिये वहाँ उन्होंने यह निश्‍चय किया कि ‘मैं तप करूँगा’॥ ४३॥

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