तब नारदजी बहुत चिन्तातुर हुए और बदरीवनमें आये। ज्ञान-वैराग्यको जगानेके लिये वहाँ उन्होंने यह निश्चय किया कि ‘मैं तप करूँगा’॥ ४३॥
ततश्चिन्तातुरः सोऽथ बदरीवनमागतः।
तपश्चरामि चात्रेति तदर्थं कृतनिश्चयः॥ ४३
तब नारदजी बहुत चिन्तातुर हुए और बदरीवनमें आये। ज्ञान-वैराग्यको जगानेके लिये वहाँ उन्होंने यह निश्चय किया कि ‘मैं तप करूँगा’॥ ४३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.2.43 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 44) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/padma/2/43/