श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.2.70

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

ईक्षूणामपि मध्यान्तं शर्करा व्याप्य तिष्ठति।

पृथग्भूता च सा मिष्टा तथा भागवती कथा॥ ७०

īkṣūṇāmapi madhyāntaṃ śarkarā vyāpya tiṣṭhati|

pṛthagbhūtā ca sā miṣṭā tathā bhāgavatī kathā|| 70

अर्थ

खाँड ईखके ओर-छोर और बीचमें भी व्याप्त रहती है, तथापि अलग होनेपर उसकी कुछ और ही मिठास होती है। ऐसी ही यह भागवतकी कथा है॥ ७०॥✎ 1565

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1565 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: श्रीमद्भागवत-पुराण → श्रीमद्भागवतपुराण

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