श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.2.8

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

पोषणं स्वेन रूपेण वैकुण्ठे त्वं करोषि च।

भूमौ भक्तविपोषाय छायारूपं त्वया कृतम्॥ ८

poṣaṇaṃ svena rūpeṇa vaikuṇṭhe tvaṃ karoṣi ca|

bhūmau bhaktavipoṣāya chāyārūpaṃ tvayā kṛtam|| 8

अर्थ

तुम अपने साक्षात् स्वरूपसे वैकुण्ठधाममें ही भक्तोंका पोषण करती हो, भूलोकमें तो तुमने उनकी पुष्टिके लिये केवल छायारूप धारण कर रखा है॥ ८॥✎ 9 10

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #9 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की
  • #10 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने → भगवान्‌ने

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