श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.3.12

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

श्रीभागवतपीयूषपानाय रसलम्पटाः।

धावन्तोऽप्याययुः सर्वे प्रथमं ये च वैष्णवाः॥ १२

śrībhāgavatapīyūṣapānāya rasalampaṭāḥ|

dhāvanto'pyāyayuḥ sarve prathamaṃ ye ca vaiṣṇavāḥ|| 12

अर्थ

सूतजी कहते हैं—इस प्रकार कहकर नारदजीके साथ सनकादि भी श्रीमद्भागवतकथामृतका पान करनेके लिये वहाँसे तुरंत गंगातटपर चले आये॥ १०॥ जिस समय वे तटपर पहुँचे, भूलोक, देवलोक और ब्रह्मलोक—सभी जगह इस कथाका हल्ला हो गया॥ ११॥ जो-जो भगवत्कथाके रसिक विष्णुभक्त थे, वे सभी श्रीमद्भागवतामृतका पान करनेके लिये सबसे आगे दौड़-दौड़कर आने लगे॥ १२॥ भृगु, वसिष्ठ, च्यवन, गौतम, मेधातिथि, देवल, देवरात, परशुराम, विश्वामित्र, शाकल, मार्कण्डेय, दत्तात्रेय, पिप्पलाद, योगेश्‍वर व्यास और पराशर, छायाशुक, जाजलि और जह्नु आदि सभी प्रधान-प्रधान मुनिगण अपने-अपने पुत्र, शिष्य और स्त्रियोंसमेत बड़े प्रेमसे वहाँ आये॥ १३-१४॥ इनके सिवा वेद, वेदान्त (उपनिषद्), मन्त्र, तन्त्र, सत्रह पुराण और छहों शास्त्र भी मूर्तिमान् होकर वहाँ उपस्थित हुए॥ १५॥ ✎ 1267 1268

यह व्याख्या श्लोक PRE.3.10 से PRE.3.15 तककी एक साथ है।

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #1267 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): श्रीमद्भागवता-मृतका → श्रीमद्भागवतामृतका
  • #1268 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): श्रीमद्भागवत-कथामृतका → श्रीमद्भागवतकथामृतका

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