श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.3.21

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

जयशब्दो नमःशब्दः शङ्खशब्दस्तथैव च।

चूर्णलाजाप्रसूनानां निक्षेपः सुमहानभूत्॥ २१

jayaśabdo namaḥśabdaḥ śaṅkhaśabdastathaiva ca|

cūrṇalājāprasūnānāṃ nikṣepaḥ sumahānabhūt|| 21

अर्थ

उस समय सब ओर जय-जयकार, नमस्कार और शंखोंका शब्द होने लगा और अबीर-गुलाल, खील एवं फूलोंकी खूब वर्षा होने लगी॥ २१॥

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