॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक PRE.3.21
जयशब्दो नमःशब्दः शङ्खशब्दस्तथैव च।
चूर्णलाजाप्रसूनानां निक्षेपः सुमहानभूत्॥ २१
jayaśabdo namaḥśabdaḥ śaṅkhaśabdastathaiva ca|
cūrṇalājāprasūnānāṃ nikṣepaḥ sumahānabhūt|| 21
अर्थ
उस समय सब ओर जय-जयकार, नमस्कार और शंखोंका शब्द होने लगा और अबीर-गुलाल, खील एवं फूलोंकी खूब वर्षा होने लगी॥ २१॥