श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.3.23

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

सूत उवाच

एवं तेष्वेकचित्तेषु श्रीमद्भागवतस्य च।

माहात्म्यमूचिरे स्पष्टं नारदाय महात्मने॥ २३

evaṃ teṣvekacitteṣu śrīmadbhāgavatasya ca|

māhātmyamūcire spaṣṭaṃ nāradāya mahātmane|| 23

अर्थ

सूतजी कहते हैं—इस प्रकार पूजा समाप्त होनेपर जब सब लोग एकाग्रचित्त हो गये, तब सनकादि ऋषि महात्मा नारदको श्रीमद्भागवतका माहात्म्य स्पष्ट करके सुनाने लगे॥ २३॥

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