॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक PRE.3.66
सूत उवाच
एवं नगाहश्रवणोरुधर्मे प्रकाश्यमाने ऋषिभिः सभायाम्।
आश्चर्यमेकं समभूत्तदानीं तदुच्यते संशृणु शौनक त्वम्॥ ६६
evaṃ nagāhaśravaṇorudharme prakāśyamāne ṛṣibhiḥ sabhāyām|
āścaryamekaṃ samabhūttadānīṃ taducyate saṃśṛṇu śaunaka tvam|| 66
अर्थ
सूतजी कहते हैं—शौनकजी! जिस समय सनकादि मुनीश्वर इस प्रकार सप्ताहश्रवणकी महिमाका बखान कर रहे थे, उस सभामें एक बड़ा आश्चर्य हुआ; उसे मैं तुम्हें बतलाता हूँ, सुनो॥ ६६॥