श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.4.28

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

मद्दत्तं नैव गृह्णन्ति प्रीत्या देवा द्विजातयः।

प्रजादुःखेन शून्योऽहं प्राणांस्त्यक्तुमिहागतः॥ २८

maddattaṃ naiva gṛhṇanti prītyā devā dvijātayaḥ|

prajāduḥkhena śūnyo'haṃ prāṇāṃstyaktumihāgataḥ|| 28

अर्थ

देवता और ब्राह्मण मेरा दिया हुआ प्रसन्‍न मनसे स्वीकार नहीं करते। सन्तानके लिये मैं इतना दुःखी हो गया हूँ कि मुझे सब सूना-ही-सूना दिखायी देता है। मैं प्राण त्यागनेके लिये यहाँ आया हूँ॥ २८॥

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