श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.4.40

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

न यास्यसि सुखं पुत्राद्यथा दैवहतोद्यमः।

अतो हठेन युक्तोऽसि ह्यर्थिनं किं वदाम्यहम्॥ ४०

na yāsyasi sukhaṃ putrādyathā daivahatodyamaḥ|

ato haṭhena yukto'si hyarthinaṃ kiṃ vadāmyaham|| 40

अर्थ

इसलिये दैव जिसके उद्योगको कुचल देता है, उस पुरुषके समान तुम्हें भी पुत्रसे सुख नहीं मिल सकेगा। तुमने तो बड़ा हठ पकड़ रखा है और अर्थीके रूपमें तुम मेरे सामने उपस्थित हो; ऐसी दशामें मैं तुमसे क्या कहूँ’॥ ४०॥

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