श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.4.42

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

सत्यं शौचं दया दानमेकभक्तं तु भोजनम्।

वर्षावधि स्त्रिया कार्यं तेन पुत्रोऽतिनिर्मलः॥ ४२

satyaṃ śaucaṃ dayā dānamekabhaktaṃ tu bhojanam|

varṣāvadhi striyā kāryaṃ tena putro'tinirmalaḥ|| 42

अर्थ

तुम्हारी स्त्रीको एक सालतक सत्य, शौच, दया, दान और एक समय एक ही अन्‍न खानेका नियम रखना चाहिये। यदि वह ऐसा करेगी तो बालक बहुत शुद्ध स्वभाववाला होगा’॥ ४२॥

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