श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.4.5

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

वैकुण्ठवासिनो ये च वैष्णवा उद्धवादयः।

तत्कथाश्रवणार्थं ते गूढरूपेण संस्थिताः॥ ५

vaikuṇṭhavāsino ye ca vaiṣṇavā uddhavādayaḥ|

tatkathāśravaṇārthaṃ te gūḍharūpeṇa saṃsthitāḥ|| 5

अर्थ

भगवान्‌के नित्य लोक-निवासी लीलापरिकर उद्धवादि वहाँ गुप्तरूपसे उस कथाको सुननेके लिये आये हुए थे॥ ५॥

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