॥ श्रीहरिः ॥
तेन वेश्याकुसङ्गेन पित्र्यं वित्तं तु नाशितम्।
एकदा पितरौ ताड्य पात्राणि स्वयमाहरत्॥ ७०
tena veśyākusaṅgena pitryaṃ vittaṃ tu nāśitam|
ekadā pitarau tāḍya pātrāṇi svayamāharat|| 70
अर्थ
वेश्याओंके जालमें फँसकर उसने अपने पिताकी सारी सम्पत्ति नष्ट कर दी। एक दिन माता-पिताको मार-पीटकर घरके सब बर्तन-भाँड़े उठा ले गया॥ ७०॥
तेन वेश्याकुसङ्गेन पित्र्यं वित्तं तु नाशितम्।
एकदा पितरौ ताड्य पात्राणि स्वयमाहरत्॥ ७०
वेश्याओंके जालमें फँसकर उसने अपने पिताकी सारी सम्पत्ति नष्ट कर दी। एक दिन माता-पिताको मार-पीटकर घरके सब बर्तन-भाँड़े उठा ले गया॥ ७०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.4.70 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 60) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/padma/4/70/