श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.4.77

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

तद्वाक्यं तु समाकर्ण्य गन्तुकामः पिताब्रवीत्।

किं कर्तव्यं वने तात तत्त्वं वद सविस्तरम्॥ ७७

tadvākyaṃ tu samākarṇya gantukāmaḥ pitābravīt|

kiṃ kartavyaṃ vane tāta tattvaṃ vada savistaram|| 77

अर्थ

गोकर्णके वचन सुनकर आत्मदेव वनमें जानेके लिये तैयार हो गया और उनसे कहने लगा, ‘बेटा! वनमें रहकर मुझे क्या करना चाहिये, यह मुझसे विस्तारपूर्वक कहो॥ ७७॥

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