अतः इसमें संदेह नहीं कि कलिकालमें चित्तकी शुद्धिके लिये इस भागवतकथाके समान मर्त्यलोकमें पापपुंजका नाश करनेवाला कोई दूसरा पवित्र साधन नहीं है॥ ९॥
अतो नृलोके ननु नास्ति किञ्चिच्चित्तस्य शोधाय कलौ पवित्रम्।
अघौघविध्वंसकरं तथैव कथासमानं भुवि नास्ति चान्यत्॥ ९
अतः इसमें संदेह नहीं कि कलिकालमें चित्तकी शुद्धिके लिये इस भागवतकथाके समान मर्त्यलोकमें पापपुंजका नाश करनेवाला कोई दूसरा पवित्र साधन नहीं है॥ ९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.4.9 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 54) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/padma/4/9/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)