श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.5.16

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 5 · अथ पञ्चमोऽध्यायः

संहृत्य वित्तं ता याताः कुलटा बहुभर्तृकाः।

धुन्धुकारी बभूवाथ महान् प्रेतः कुकर्मतः॥ १६

saṃhṛtya vittaṃ tā yātāḥ kulaṭā bahubhartṛkāḥ|

dhundhukārī babhūvātha mahān pretaḥ kukarmataḥ|| 16

अर्थ

वे कुलटाएँ धुन्धुकारीकी सारी सम्पत्ति समेटकर वहाँसे चंपत हो गयीं; उनके ऐसे न जाने कितने पति थे। और धुन्धुकारी अपने कुकर्मोंके कारण भयंकर प्रेत हुआ॥ १६॥

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