श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.5.37

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 5 · अथ पञ्चमोऽध्यायः

प्रातस्तमागतं दृष्ट्वा लोकाः प्रीत्या समागताः।

तत्सर्वं कथितं तेन यज्जातं च यथा निशि॥ ३७

prātastamāgataṃ dṛṣṭvā lokāḥ prītyā samāgatāḥ|

tatsarvaṃ kathitaṃ tena yajjātaṃ ca yathā niśi|| 37

अर्थ

प्रातःकाल उनको आया देख लोग प्रेमसे उनसे मिलने आये। तब गोकर्णने रातमें जो कुछ जिस प्रकार हुआ था, वह सब उन्हें सुना दिया॥ ३७॥✎ 16

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #16 शब्दोंके बीचका स्थान: करो,है → करो, है

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