श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.5.65

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 5 · अथ पञ्चमोऽध्यायः

भिद्यते हृदयग्रन्थिश्छिद्यन्ते सर्वसंशयाः।

क्षीयन्ते चास्य कर्माणि सप्ताहश्रवणे कृते॥ ६५

bhidyate hṛdayagranthiśchidyante sarvasaṃśayāḥ|

kṣīyante cāsya karmāṇi saptāhaśravaṇe kṛte|| 65

अर्थ

सप्ताहश्रवण करनेसे मनुष्यके हृदयकी गाँठ खुल जाती है, उसके समस्त संशय छिन्‍न-भिन्‍न हो जाते हैं और सारे कर्म क्षीण हो जाते हैं॥ ६५॥

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