॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक PRE.5.70
श्रवणं समभागेन सर्वेषामिह दृश्यते।
फलभेदः कुतो जातः प्रब्रुवन्तु हरिप्रियाः॥ ७०
śravaṇaṃ samabhāgena sarveṣāmiha dṛśyate|
phalabhedaḥ kuto jātaḥ prabruvantu haripriyāḥ|| 70
अर्थ
गोकर्णने पूछा—भगवान्के प्रिय पार्षदो! यहाँ हमारे अनेकों शुद्धहृदय श्रोतागण हैं, उन सबके लिये आपलोग एक साथ बहुत-से विमान क्यों नहीं लाये? हम देखते हैं कि यहाँ सभीने समानरूपसे कथा सुनी है, फिर फलमें इस प्रकारका भेद क्यों हुआ, यह बताइये॥ ६९-७०॥