श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.6.101

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

रसप्रवाहसंस्थेन श्रीशुकेनेरिता कथा।

कण्ठे सम्बध्यते येन स वैकुण्ठप्रभुर्भवेत्॥ १०१

rasapravāhasaṃsthena śrīśukeneritā kathā|

kaṇṭhe sambadhyate yena sa vaikuṇṭhaprabhurbhavet|| 101

अर्थ

श्रीशुकदेवजीने प्रेमरसके प्रवाहमें स्थित होकर इस कथाको कहा था। इसका जिसके कण्ठसे सम्बन्ध हो जाता है, वह वैकुण्ठका स्वामी बन जाता है॥ १०१॥

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