इसके पश्चात् धूप-दीप आदि सामग्रियोंसे श्रीमद्भागवतकी भी बड़े उत्साह और प्रीतिपूर्वक विधि-विधानसे पूजा करे॥ २८॥
श्रीमद्भागवतस्यापि ततः पूजा प्रयत्नतः।
कर्तव्या विधिना प्रीत्या धूपदीपसमन्विता॥ २८
इसके पश्चात् धूप-दीप आदि सामग्रियोंसे श्रीमद्भागवतकी भी बड़े उत्साह और प्रीतिपूर्वक विधि-विधानसे पूजा करे॥ २८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.6.28 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 73) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/padma/6/28/