ghṛtapānaṃ payaḥpānaṃ kṛtvā vai śṛṇuyātsukham|| 41
अर्थ
यदि शक्ति हो तो सातों दिन निराहार रहकर कथा सुने अथवा केवल घी या दूध पीकर सुखपूर्वक श्रवण करे॥ ४१॥
उपोष्य सप्तरात्रं वै शक्तिश्चेच्छृणुयात्तदा।
घृतपानं पयःपानं कृत्वा वै शृणुयात्सुखम्॥ ४१
यदि शक्ति हो तो सातों दिन निराहार रहकर कथा सुने अथवा केवल घी या दूध पीकर सुखपूर्वक श्रवण करे॥ ४१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.6.41 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 74) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/padma/6/41/