श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.6.49

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

रजस्वलान्त्यजम्लेच्छपतितव्रात्यकैस्तथा।

द्विजद्विड्वेदबाह्यैश्‍च न वदेद्यः कथाव्रती॥ ४९

rajasvalāntyajamlecchapatitavrātyakaistathā|

dvijadviḍvedabāhyaiśca na vadedyaḥ kathāvratī|| 49

अर्थ

नियमसे कथा सुननेवाले पुरुषको रजस्वला स्त्री, अन्त्यज, म्लेच्छ, पतित, गायत्रीहीन द्विज, ब्राह्मणोंसे द्वेष करनेवाले तथा वेदको न माननेवाले पुरुषोंसे बात नहीं करनी चाहिये॥ ४९॥

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