श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.6.5

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

देशे देशे तथा सेयं वार्ता प्रेष्या प्रयत्नतः।

भविष्यति कथा चात्र आगन्तव्यं कुटुम्बिभिः॥ ५

deśe deśe tathā seyaṃ vārtā preṣyā prayatnataḥ|

bhaviṣyati kathā cātra āgantavyaṃ kuṭumbibhiḥ|| 5

अर्थ

फिर प्रयत्न करके देश-देशान्तरोंमें यह संवाद भेजना चाहिये कि यहाँ कथा होगी, सब लोगोंको सपरिवार पधारना चाहिये॥ ५॥✎ 1270

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1270 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): श्रीमद्भागवत-की → श्रीमद्भागवतकी

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