श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.6.57

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

प्रसादतुलसीमाला श्रोतृभ्यश्चाथ दीयताम्।

मृदङ्गतालललितं कर्तव्यं कीर्तनं ततः॥ ५७

prasādatulasīmālā śrotṛbhyaścātha dīyatām|

mṛdaṅgatālalalitaṃ kartavyaṃ kīrtanaṃ tataḥ|| 57

अर्थ

फिर वक्ता श्रोताओंको प्रसाद, तुलसी और प्रसादी मालाएँ दे तथा सब लोग मृदंग और झाँझकी मनोहर ध्वनिसे सुन्दर कीर्तन करें॥ ५७॥

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