फिर बारह ब्राह्मणोंको खीर और मधु आदि उत्तम-उत्तम पदार्थ खिलाये तथा व्रतकी पूर्तिके लिये गौ और सुवर्णका दान करे॥ ६४॥
द्वादश ब्राह्मणान् पश्चाद्भोजयेन्मधुपायसैः।
दद्यात्सुवर्णं धेनुं च व्रतपूर्णत्वहेतवे॥ ६४
फिर बारह ब्राह्मणोंको खीर और मधु आदि उत्तम-उत्तम पदार्थ खिलाये तथा व्रतकी पूर्तिके लिये गौ और सुवर्णका दान करे॥ ६४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.6.64 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 75) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/padma/6/64/