कथाके अन्तमें ज्ञान, वैराग्य और भक्तिको बड़ी पुष्टि मिली और वे तीनों एकदम तरुण होकर सब जीवोंका चित्त अपनी ओर आकर्षित करने लगे॥ ७२॥
तदन्ते ज्ञानवैराग्यभक्तीनां पुष्टता परा।
तारुण्यं परमं चाभूत्सर्वभूतमनोहरम्॥ ७२
कथाके अन्तमें ज्ञान, वैराग्य और भक्तिको बड़ी पुष्टि मिली और वे तीनों एकदम तरुण होकर सब जीवोंका चित्त अपनी ओर आकर्षित करने लगे॥ ७२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण PRE.6.72 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 76) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/padma/6/72/