श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.6.83

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

स्वर्गे सत्ये च कैलासे वैकुण्ठे नास्त्ययं रसः।

अतः पिबन्तु सद्भाग्या मा मा मुञ्चत कर्हिचित्॥ ८३

svarge satye ca kailāse vaikuṇṭhe nāstyayaṃ rasaḥ|

ataḥ pibantu sadbhāgyā mā mā muñcata karhicit|| 83

अर्थ

यह रस स्वर्गलोक, सत्यलोक, कैलास और वैकुण्ठमें भी नहीं है। इसलिये भाग्यवान् श्रोताओ! तुम इसका खूब पान करो; इसे कभी मत छोड़ो, मत छोड़ो॥ ८३॥✎ 1273

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1273 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): श्रीमद्भागवत-महापुराणकी → श्रीमद्भागवतमहापुराणकी

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