श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक PRE.6.89

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण) · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

नगाहगाथासु च सर्वभक्तैरेभिस्त्वया भाव्यमिति प्रयत्नात्।✎ 1499

मनोरथोऽयं परिपूरणीयस्तथेति चोक्‍त्वान्तरधीयताच्युतः॥ ८९✎ 1500

nagāhagāthāsu ca sarvabhaktairebhistvayā bhāvyamiti prayatnāt|

manoratho'yaṃ paripūraṇīyastatheti coktvāntaradhīyatācyutaḥ|| 89

अर्थ

‘भगवन्! हमारी यह अभिलाषा है कि भविष्यमें भी जहाँ-कहीं सप्ताह-कथा हो, वहाँ आप इन पार्षदोंके सहित अवश्य पधारें। हमारा यह मनोरथ पूर्ण कर दीजिये’। भगवान् ‘तथास्तु’ कहकर अन्तर्धान हो गये॥ ८९॥

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #1499 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: सर्वभक्तै- रेभिस्त्वया → सर्वभक्तैरेभिस्त्वया
  • #1500 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: परिपूरणीय- स्तथेति → परिपूरणीयस्तथेति

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