राजा परीक्षित्ने वज्रनाभकी बात उन्हें कह सुनायी। इसके बाद महर्षि शाण्डिल्य बड़ी प्रसन्नतासे उनको सान्त्वना देते हुए कहने लगे—॥ १८॥
उपोद्घातं विष्णुरातश्चकाराशु ततस्त्वसौ।
उवाच परमप्रीतस्तावुभौ परिसान्त्वयन्॥ १८
राजा परीक्षित्ने वज्रनाभकी बात उन्हें कह सुनायी। इसके बाद महर्षि शाण्डिल्य बड़ी प्रसन्नतासे उनको सान्त्वना देते हुए कहने लगे—॥ १८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण POST.1.18 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 985) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/skanda/1/18/