श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक POST.1.19

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (स्कन्दपुराण) · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

शाण्डिल्य उवाच

शृणुतं दत्तचित्तौ मे रहस्यं व्रजभूमिजम्।

व्रजनं व्याप्तिरित्युक्त्या व्यापनाद् व्रज उच्यते॥ १९

śṛṇutaṃ dattacittau me rahasyaṃ vrajabhūmijam|

vrajanaṃ vyāptirityuktyā vyāpanād vraja ucyate|| 19

अर्थ

शाण्डिल्यजीने कहा—प्रिय परीक्षित् और वज्रनाभ! मैं तुमलोगोंसे व्रजभूमिका रहस्य बतलाता हूँ। तुम दत्तचित्त होकर सुनो। ‘व्रज’ शब्दका अर्थ है व्याप्ति। इस वृद्धवचनके अनुसार व्यापक होनेके कारण ही इस भूमिका नाम ‘व्रज’ पड़ा है॥ १९॥

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