श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक POST.1.6

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (स्कन्दपुराण) · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

पितृव्यमागतं ज्ञात्वा वज्रः प्रेमपरिप्लुतः।

अभिगम्याभिवाद्याथ निनाय निजमन्दिरम्॥ ६

pitṛvyamāgataṃ jñātvā vajraḥ premapariplutaḥ|

abhigamyābhivādyātha nināya nijamandiram|| 6

अर्थ

जब वज्रनाभको यह समाचार मालूम हुआ कि मेरे पितातुल्य परीक्षित् मुझसे मिलनेके लिये आ रहे हैं, तब उनका हृदय प्रेमसे भर गया। उन्होंने नगरसे आगे बढ़कर उनकी अगवानी की, चरणोंमें प्रणाम किया और बड़े प्रेमसे उन्हें अपने महलमें ले आये॥ ६॥

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