श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक POST.1.7

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (स्कन्दपुराण) · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

परिष्वज्य स तं वीरः कृष्णैकगतमानसः।

रोहिण्याद्या हरेः पत्‍नीर्ववन्दायतनागतः॥ ७

pariṣvajya sa taṃ vīraḥ kṛṣṇaikagatamānasaḥ|

rohiṇyādyā hareḥ patnīrvavandāyatanāgataḥ|| 7

अर्थ

वीर परीक्षित् भगवान् श्रीकृष्णके परम प्रेमी भक्त थे। उनका मन नित्य-निरन्तर आनन्दघन श्रीकृष्णचन्द्रमें ही रमता रहता था। उन्होंने भगवान् श्रीकृष्णके प्रपौत्र वज्रनाभका बड़े प्रेमसे आलिंगन किया। इसके बाद अन्तःपुरमें जाकर भगवान् श्रीकृष्णकी रोहिणी आदि पत्‍नियोंको नमस्कार किया॥ ७॥

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